Bhaiyaji special report on international girl child day | इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे

 

ये नशा ज्यादा जरुरी है, 16 घंटे काम करने पड़ते हैं, आप नहीं समझेंगे. हम यह मंज़र रोज़ देखते हैं, हर दिन हमारे आँखों के सामने से ये बच्चियां निकलती हैं. हम या तो इन्हें कुछ दे देते हैं या फिर डांट के भगा देते हैं. कभी थोड़ी देर भी बैठकर विचार किया है कि आखिर ये स्थिति क्यों है हमारे देश में ? बच्चियां क्यों आ रही हैं इसकी चपेट में ? ये रिपोर्ट आपको हमारे देश में बच्चियों की वर्तमान स्थिति की बहुत-सी जानकारी देगी !

Bhaiyaji special report on international girl child day | इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे

भारत, संस्कृति और सभ्यताओं का देश जहाँ ”वसुधेव कुटुम्बकम” की परम्परा को माना जाता है. एक देश जो दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहाँ लोगों की हुकूमत चलती है. इस देश में हर तरह के धर्म को मान्यता मिली हुई है, हर धर्म यहाँ खुलकर सांस लेते हैं. यहाँ कोई जातिवाद नहीं, कोई भेदभाव नहीं है पर क्या वाकई ऐसा है ! क्या वाकई पुरुषों और महिलाओं में भेदभाव नहीं होता है, बेटा और बेटी एक बराबर हैं, बेटा कुलदीपक है तो क्या बेटियाँ कुल का मान बढ़ाती हैं, ऐसा क्या सच में इस देश के लोग मानते हैं.

11 अक्टूबर को विश्वभर में ”इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे” मनाया जाता है. एक दिन जो पूर्णतः लड़कियों यानी बच्चियों को समर्पित है. हमारे देश में भी यह दिवस मनाया जाएगा, जगह-जगह पर नुक्कड़ नाटक होंगे, थिएटर प्ले किये जायेंगे, संदेश भेजें जायेंगे और ना जाने क्या-क्या ! पर आपने सोचा है कि ये सब बस एक दिन होगा फिर वापस वही रुढ़िवादी सोच और परम्पराओं से इन नन्ही कलियों को जकड़ दिया जाएगा.

दरअसल हम दिखावे के बड़े शौक़ीन हैं और पश्चिमी सभ्यता तो हम पर बहुत समय से राज़ कर रही है और हम इसके गिरफ़्त में भी हैं. तो भला कोई अंतर्राष्ट्रीय दिवस हो और हम ना मनाये, लालत हैं हम पर ! ये बातें जरुर आपको कड़वी लगेंगी और शायद आप आगे इस लेख पढ़ें भी ना. पर मैं आपसे विनती करुंगी कि कृपया इस लेख को पढ़ें और वर्तमान परिदृश्य को देखने एवं समझने की कोशिश करें.

”इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे” पर आपसे भारत में लड़कियों से जुड़ें कई मुद्दों को साझा करते हैं और अंत में आप पर यह छोड़ते हैं कि वाकई जो हालात वर्तमान में हैं, वो न्यायसंगत हैं !

1. लिंग अनुपात 

भारत में हर 10 साल में जनगणना होती है. जनगणना की शुरुआत 1871 में हुई जब देश गुलाम था. आज़ाद भारत की जनगणना 1951 से शुरू हुई. पहली जनगणना का लिंग अनुपात था – प्रति 1000 पुरुषों पर 946 महिलाएं. उसके बाद से हर 10 साल में जनगणना होती है. आखिरी जनगणना 2011 में हुई है और इस जनगणना का लिंग अनुपात है – प्रति 1000 पुरुषों पर 940 महिलाएं. 1951 से 2011 के बीच जितने भी जनगणना हुए हैं, उनमें लिंग का अनुपात ऐसा ही रहा है.

 

आज़ादी के बाद कुछ सालों तक यह अनुपात ठीक रहा था लेकिन उसके बाद अचानक ही लड़कियों की संख्या में कमी आने लगी. इसके कई कारन हैं जिसमें सबसे महत्वपूर्ण है ये सोच कि लड़कियां पराया धन होती हैं और उन्हें एक दिन विदा करना होता है, दूसरा हमारे देश में चल रही दहेज़ की कुप्रथा. 2011 की जनगणना देखें तो केरल एक मात्र राज्य जहाँ लड़कियों की संख्या लड़कों से अधिक है. केरल राज्य का लिंग अनुपात है – प्रति 1000 लड़कों में 1086 लड़कियां. जबकि सबसे ख़राब लिंग अनुपात है ‘हरियाणा’ राज्य का, प्रति 1000 लड़कों पर 879 लड़कियां.

2. कन्या भ्रूण हत्या

भारतीय समाज़ में लड़कियों को हमेशा से ही बोझ माना जाता है. लड़कियों को तो अभिशाप तक मानते हैं. प्राचीनकाल से ही माता-पिता और समाज एक लड़की को उनके ऊपर एक बोझ मानते है और समझते है कि लड़कियां उपभोक्ता होती हैं जबकि लड़के उत्पादक होते हैं. गर्भ से लिंग परीक्षण जाँच के बाद गर्भ से गर्भावस्था के 18 हफ्तों बाद बालिका शिशु को हटाना कन्या भ्रूण हत्या कहलाता है. दरअसल 1990 के दशक से तकनीकी वृद्धि होने के कारण कुछ ऐसे मशीन का अविष्कार हुआ जिससे गर्व में पल रहे भ्रूण के लिंग का पता लगाया जा सकता है, इस प्रक्रिया को अल्ट्रासाउंड कहते हैं.

Bhaiyaji special report on international girl child day | इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे
                                अल्ट्रासाउंड तकनीक

इस प्रक्रिया का उपयोग भ्रूण का विकास सही तरीके से हो रहा है या नहीं, उसे कोई बीमारी तो नहीं, इन सबका पता लगाने के लिए होता है, लेकिन हमनें इसका उपयोग कन्या भ्रूण की हत्या करने के लिए किया और अब भी कर रहे हैं. इस कारण से लिंग परिक्षण को भारत में गैर-क़ानूनी कर दिया गया है. हांलाकि अभी भी यह किया जाता है और कई नन्ही बच्चियों को कोख़ में ही मार दिया जाता है. 2009 में कलर्स चैनल पर इसी मुद्दे को लेकर डेली शोप ”ना आना इस देश लाडो” का निर्माण हुआ था.

3.गर्भपात

भारत में गर्भधारण करने के 4 महीने तक आप गर्भपात करवा सकते हैं, उसके बाद यह गैर-क़ानूनी है. 4 महीने में गर्भ का लगभग विकास हो जाता है और उसके बाद यही एबॉर्शन होता है तो यह माँ और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए ख़तरनाक हो सकता है. ऐसे मामले भी हुए हैं जिनमें जान तक की हानि हुई है. लड़कियों के संदर्भ में यह बात करना इसलिए आवश्यक है क्योंकि कई बार बालिग़ होने से पहले ही उन्हें गर्भपात करवाना पड़ जाता है, कारण आप समझते हैं. जी हाँ, ये अक्सर रेप केसेज़ में होता है.

Bhaiyaji special report on international girl child day | इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे

मुंबई के एक बस्ती में, 14 साल की एक लड़की थी, उसके स्कूल वैन के ड्राईवर ने उससे डरा-धमकाकर कई बार उसके साथ जबरदस्ती की और एक दिन वो लड़की गर्भवती हो गयी. उस आदमी ने अपनी गलती नहीं मानी और उस लड़की के माँ-बाप ने भी समाज़ के डर से उसका गर्भपात करवा दिया लेकिन इसमें उस लड़की की भी जान चली गयी. ऐसे मामले हमारे यहाँ कई हैं.

4. बच्चों का भीख मांगना

Bhaiyaji special report on international girl child day | इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे

हमारे देश में यह एक ऐसी समस्या है जिसका निदान हम अबतक नहीं कर पाएं हैं और यकीन मानिये जो हालात हैं उसमें कर भी नहीं पायेंगे. बच्चों का भीख मांगना, यह नज़ारा लगभग रोज हम देखते हैं और कभी मन हुआ तो पैसे या कुछ चीज़ दे दी और कभी डांट के भगा देते हैं. हांलाकि हम कभी भी भीख नहीं देते हैं. कभी-कभी थोड़े अच्छे नागरिक का फ़र्ज़ निभाते हुए इस मामले पर चर्चा कर लेते हैं. फिर भी, कोई सुधार देखने को अबतक नहीं मिला है.

Bhaiyaji special report on international girl child day | इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे

प्रतिदिन लगभग देशभर में 3 लाख बच्चों को जबरदस्ती मारकर या उन्हें नशा देकर भीख मंगवाई जाती है. इनमें लड़कियों की भी संख्या बहुत अधिक होती है. यह ”चाइल्ड ट्रैफिकिंग (बच्चों का अवैध व्यापार)” का एक रूप है जहाँ बच्चों को जबरदस्ती किडनैप करके या खरीदकर लाया जाता है और उनसे यह गैर-क़ानूनी काम करवाया जाता है.

5. बाल विवाह

Bhaiyaji special report on international girl child day | इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे

यह नाम सुनकर सबसे पहला ख्याल कलर्स चैनल पर आये सीरियल ”बालिका वधू” का आता है. 2008 में आये इस सीरियल ने बाल विवाह पर करारा प्रहार किया था और समाज में चल रहे कुप्रथा को सबके सामने लाया था. ऐसा नहीं था कि इससे पहले लोग इसके बारे में जानते नहीं थे, बेशक जानते थे और देखते भी थे लेकिन आवाज़ नहीं उठाते थे.

इस सीरियल ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि हमनें अपने समाज़ में कैसी-कैसी प्रथाओं को जगह दी हुई है जो एक बच्ची से उसकी इच्छा, उसका बचपना ही छीन लेता है. बाल विवाह, एक लड़की से उसके शिक्षा के अधिकार, स्वास्थ्य के अधिकार और समाज में उसके विकास की भागीदारी का अधिकार का हनन है.

Bhaiyaji special report on international girl child day | इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे

भारत, दुनिया का तीसरा ऐसा देश है जहाँ सबसे अधिक बाल-वधू हैं. भारत में लगभग आधी महिलाओं की शादी उनके बालिग़ होने से पहले कर दी जाती है. बिहार, झारखंड और राजस्थान में 10 में से 6 लड़कियों की शादी बचपन में कर दी जाती है.

6. लड़कियों खासतौर से सड़कों पर भीख मांगनेवाली बच्चियों में नशे की लत

Bhaiyaji special report on international girl child day | इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे

ये एक ऐसा मुद्दा है जिसपर बात थोड़ी कम होती है. हो भी कैसे, भाई हमारा देश संस्कारों वाला देश है तो लड़कियां अगर सिगरेट फूंके या शराब पिए तो इसका मतलब समझते रहे हैं ना आप ! तौबा-तौबा ! खैर, यदि थोड़ी संजीदगी से इस मामले की चर्चा करें तो जो रिपोर्ट्स हैं वो चौकाने वाले हैं. पिछले तीन सालों में लड़कियों में नशे की लत में 31 % से 50 % की वृद्धि हुई है, चाहे वो शराब हो या ड्रग्स.

मुंबई में एक चौक पर सिग्नल हुई तभी एक 11 साल की बच्ची गुब्बारे बेचने एक गाड़ी के पास आई, उसके 4गुब्बारे बिक गए और उसको 40 रूपये मिले, सामने ही एक गुमटी थी जहाँ सिगरेट और गुटका मिलता था, बच्ची वहां गयी और उसने गुटका ख़रीदा और तुरंत खा लिया. उससे पूछने पर की उसने खाने की चीज़ क्यों नहीं ली और ये नशे की वस्तु क्यों ली, उसका जवाब था, ये नशा ज्यादा जरुरी है, 16 घंटे काम करने पड़ते हैं.

Bhaiyaji special report on international girl child day | इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे

इससे आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि विकासशील देश भारत की असली तस्वीर क्या है और हाँ ऐसी कहानियाँ आपको कई मिल जायेंगी.

7. लड़कियों के लिए बनाये गए कानून 

भारतीय संविधान में ऐसे तो कई कानून हैं जो लड़कियों की अधिकारों की सुरक्षा करते हैं पर यहाँ हम कुछ ऐसे कानून से आपको परिचित करवाते हैं जिसकी जानकारी हर लड़की को होनी चाहिए –

* बाल विवाह कानून निषेध,2006 : इस कानून के तहत यदि किसी लड़की की शादी 18 वर्ष के पहले होती है तो उसके माँ-बाप को सज़ा मिलना का प्रावधान है.

* स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 : इसके तहत तालाकशुदा महिला दूसरी शादी कर सकती है. साथ ही, दूसरे कास्ट में शादी करने का भी प्रावधान है.

* दहेज़ निषेध कानून, 1962 : शादी के समय दहेज़ देना या लेना कानूनन अपराध है और ऐसा करने पर इस कानून के तहत सजा का प्रावधान है.

* काम के स्थान पर प्रताड़ना एक्ट, 2013 : इसके तहत यदि काम के स्थान या ऑफिस में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या बदतमीज़ी होती है तो सजा का प्रावधान है.

* नेशनल कमीशन फॉर वीमेन एक्ट, 1990 : इस कानून को जनवरी, 1992 में बनाया गया जिसके तहत औरतों के हक़ और अधिकारों के लिए आवाज़ उठाया जाएगा. यह कानून महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए लाया गया है.

आपके सामने देश में लड़कियों की हालत का एक ‘ब्लू मैप’ रखने की कोशिश की है. इसे देखकर समझिये और सोचिये कि क्या एक दिवस मना लेना ही काफी है या फिर धीरे-धीरे बदलाव लाने का प्रयास किया जाना चाहिए. आप सभी को ”इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे” की शुभकामनायें, ”बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ”.

 

Check out the video coverage here ⇓⇓

 

 

 

Facebook Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published.