किताब जो जिंदगी को हैप्पनिंग बना देती है । Bhaiyaji special

 

स्टोरी- पंकज कसरादे

 

मुसाफिर कैफै…

 

….नाम से ही लग रहा न किसी बंजारों का कैफ़े,आवारा, अपनी मंजिल की तलाश में भटकते हुए मुसाफिरों को राहत देने का एक अड्डा …हाँ! म मतलब मुसाफ़िर कैफ़े एक ऐसी ही किताब, जो जिन्दगी के तमाम फलसफो को हिंदी की वर्णमाला से जोड़ते हुए जिंदगी जीने का एक नया तरीका सिखाती है,कुछ अलग तरह से सोचने का,अपने आप में मगन रहने का एक जरिया देती है …मुसाफ़िर कैफ़े

दिव्य प्रकाश दुबे जो की इस किताब के लेखक है उन्होंने हिंदी के इस नये दौर में हिंदी की पुरानी लीक से हटकर आम बोलचाल की भाषा जिसमे हिंदी और अंग्रेजी का मिक्स अप आपको पढने को मिलेगा कागज़ पर उतार कर रख दी ।

तो आइये ज से जानते है इस बेस्ट सेलर किताब के बारे में कि आखिर इसमें ऐसा क्या है जो ये किताब आज के युवाओ को खासा आकर्षित कर रही है ।

अगर आप भी प मतलब प्रेम में होंगे तो ये किताब आपको ज़रूर पढनी चाहिए क्योकि यह  किताब आपको बताएगी क से कहानी, ह से हेल्लो, ए से एक दिन की बात,क से कार्नर वाली सीट,प से पोहा,ड से डबल बेड, फिर च से चुड़ैल,द से दिमाग का दही,फिर स से शुरू हुई सैड स्टोरी,और स से सिगरेट, और फिर ट से टाटा बाय बाय ….फिर जिंदगी कहती है ब से बेटा शादी कर ले, और फिर हो जाता है ड मतलब डिलीट ।

किताब पढते वक्त किताब के किरदारों के नाम सुधा और चंदर  देखकर आपके जेहन में धर्मवीर भारती की लिखी गयी कालजयी रचना गुनाहों का देवता दस्तक जरुर देगी ।

किताब की लिखावट के बारे में बात करे तो पहले पन्ने से ही ये किताब आपको बाँध कर रखेगी और आखिर तक आते आते आप भी खुद को किसी मुसाफ़िर कैफ़े में पाओगे ..एक अलग ही दुनिया में,अपने सपनो की दुनिया में ..

जी हाँ ..लेखक कहता है बात से पहले की बात ..वो बातें जो किताबों से पहले पैदा हो गयी,वो बातें जिन्हें किसी ने संभाल कर रखा तो एक पन्ना बना..और इन पन्नों से मिलकर बनी एक किताब..तो अगर जिंदगी को समझना है तो ज़रूरी नही क़िताबे ही पढ़ी जाए ..कुछ बातों को पढने से भी जिंदगी के असल मायने समझ में आ जाते है ।

किताब में लेखक ने ऐसे ही बातों ही बातों में बहुत साधारण लहजे में इतनी बड़ी बड़ी बातें कह दी है जो आपके दिल और दिमाग से निकल ही नही सकती,

आपसी रिश्तों को लेकर लेखक कहता है कि “वो रिश्ते कभी लम्बे नही चलते जिनमें सबकुछ जान लिया जाता है”

कॉफ़ी हाउस, घर,जिंदगी,इश्क़,किस्मत इन सब से बना हुआ जायका है मुसाफ़िर कैफ़े

आइये  किताब की उन साधारण सी लगने वाली बातों पर गौर फरमाए जो लेखक ने बड़ी ही संजीदगी से कह दी है,और जिन्हें पढने के बाद वो संजीदगी एक गंभीर मुस्कान के साथ जिन्दगी के तमाम पहलुओ के बारे में सोचने की ओर इशारा करती है

“किसी को समझना हो तो उसकी शेल्फ में लगी किताबों को देख लेना चाहिए,किसी की आत्मा समझनी हो तो उन किताबों में लगी अंडरलाइन को पढना चाहिए”

“जिनके पास खोने को कुछ नही होता वो फैसले जल्दी ले लेते है”

हमारी गलतियों के बारे में किताब में एक जगह लिखा है की “गलतियाँ सुधारनी ज़रूर चाहिए लेकिन मिटानी नही चाहिए,क्योकिं गलतियाँ वो पगडंडीया होती है जो बताते रहती है की हमने शुरू कहाँ से किया था”

“बाहर से हमारी लाइफ जितनी परफेक्ट दिखती है असल में उतनी होती नही है,परफेक्ट लाइफ भी भला कोई लाइफ हुई”

जिंदगी के उस दौर का ज़िक्र भी आपको पढने को मिलेगा जब आपको नींद आना बंद हो जाती है ।

“जब रात में अच्छी नींद आना बंद हो जाए तब मान लेना चाहिए की आगे जिंदगी में ऐसा दौर आने वाला है जिसके बाद सबकुछ बदल जायेगा”

तो,अगर आप भी पढ़ने के शौकीन है अगर नही है तो एक बार ये किताब उठा कर देखिये आपको भी किताबों से इश्क हो जायेगा,और अगर पढने के शौकीन है तब तो ज़रूर इसे पढ़िए आधुनिक शब्दावली और नये जज्बातों की एक रोचक कहानी मिलेगी..

तो प से पढ़ डालिए द से दिव्य प्रकाश दुबे द्वारा लिखी म से शुरू हुई मुसाफ़िर कैफ़े को आज ही ।

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