विश्वयुद्ध जिसने आधी दुनिया के चिथड़े उड़ाकर रख दिए । Bhaiyaji special

 

28 जून 1914 को रविवार के दिन ऑस्ट्रिया हंगरी के राजकुमार फ्रेंज फारडिन्नड और उनकी पत्नी आस्ट्रिया हंगरी के एक शहर साराजिवो  के लिए एक प्रोग्राम देखने रवाना हुए जो उनका अपना ही जीता हुआ था और खुद के साम्राज्य में था लेकिन फिर भी उनके गुप्तचरों ने उनको उस शहर जाने की चेतावनी दी थी ।

सवाल यह उठता है कि उनके गुप्तचरों ने उनके ही जीते हुए राज्य की मुलाकात लेने से क्यों रोका, तो बात साफ़ है कि ऑस्ट्रिया हंगरी के राजा फ्रेंज जोसेफ  जब 1908 में जब Bosni Herecebovina देश को जीत लिया तो अब Bosni Herecebovina देश का अपना अस्तित्व मिट गया था, यह पूरा का पूरा देश अब किसी का गुलाम था इस बात से नाखुश वहां के कई लोग क्रन्तिकारी भी बन चुके थे जिसका नाम था ब्लैक हैण्ड ।

विश्वयुद्ध जिसने आधी दुनिया के चिथड़े उड़ाकर रख दिए । Bhaiyaji special

ये क्रन्तिकारी राजा  के सामने आमने सामने की लड़ाई तो नहीं लड़ सकते थे लेकिन वो किसी बड़ी क्योंकि राजा की सत्ता को ललकारने की उनमें हिम्मत नहीं थी, लेकिन वो क्रन्तिकारी किसी बड़ी तख़्त में थे और राजकुमार के इस शहर में जाना उनके लिए एक बड़ी तख़्त थी, तो इस प्रकार राजकुमार  का इस शहर जाना क्रांतिकारियों से खतरा था ,  जब राजकुमार   को या सुचना दी गयी की अपका वहां जाना खतरे से खली नहीं लेकिन उन्होंने अपने गुप्तचरों की बात को यह टाल दिया की हमें कुछ नहीं होगा हमें इश्वर पर भरोसा करना चाहिए ।

दरअसल आगे भी तीन बार राजकुमार को मारने के विफल प्रयास हो चुके थे लेकिन उन्हें बचा लिया गया था , यदि अपने गुप्तचरों की बात को मान कर राजकुमार इस शहर न जाते तो शायद जैसी दुनिया हम आज देख रहे हैं वैसे नहीं होती तो इस तरह राजकुमार अपनी पत्नी को लेकर साराजिवो शहर पहुँच गए और यहाँ इनका भव्य स्वागत किया गया और ।

इनके लिए स्पेशल 6 कारे मंगवाई गयी थी इनके लिए खुले छत की कार भी मंगवाई गयी थी रोड पर बहुत सारे लोग इन दोनों की जोड़ी को देखने के लिए जुटे थे और इस भीड़ में वो क्रांतिकारी भी शामिल थे जो आज राजकुमार का काम तमाम करने के लिए वहां आये थे उनमे से एक क्रन्तिकारी ने अपनी जेब से बम निकला और खुली छत वाली राजकुमार की गाडी पर फेंक दिया लेकिन राजकुमार की किस्मत ऐसी थी की इस बार भी बम गाड़ी के बोनट से टकराते हुए पीछे की और गिरा और बहुत बड़ा धमाका हुआ और फिर बम फेंकने वाले ने अपने जेब से साईनाईड की गोली निकाली और खा ली और उसके बाद वह पुल से नीचे गिर गया लेकिन ज़हर धीमा साबित हुआ और नीचे ज्यादा पानी भी नहीं था इस कारण वह बच गया और उसी वक़्त गिरफ्तार कर लिया गया ।

राजकुमार ने घायल लोगो को हॉस्पिटल ले जाने के आदेश दिए और वे अपने टाउन हॉल के लिए अपने काफिले के साथ रवाना हुए ,वो जब टाउन हॉल पहुचे तो बहुत गुस्से में थे और उन्होंने वहां कोई कार्यक्रम नहीं देखा और हॉस्पिटल में घायल लोगों को देखने टाउन हॉल से उसी काफिले के साथ हॉस्पिटल के लिए अपनी पत्नी के साथ रवाना हुए , रास्ता वही था और भीड़ वही थी जिसमें 6 सशस्त्र क्रन्तिकारी भी मौजूद थे उनमे से एक ने मौके का फायदा उठाते हुए अपनी जेब से पितौल निकली और एक के बाद एक फायरिंग शुरू कर दी जिनमे से एक राजकुमार के गले में लगी और एक राजकुमारी के पेट में , उनको बचने की सारी कोशिशे नाकाम रही और दोनों की मौत हो गयी अब आगे इसका अंजाम भी कुछ बड़ा होने वाला था ।

विश्वयुद्ध जिसने आधी दुनिया के चिथड़े उड़ाकर रख दिए । Bhaiyaji special

पहले विश्व युद्ध को ‘द ग्रेट वार’ भी कहा जाता है क्योंकि जब यह युद्ध हुआ उस से पहले इतना बड़ा युद्ध कभी नहीं हुआ तह इस से लगभग पुरे देश प्रभावित थे करोडों लोग मरे और अरबो का नुक्सान हुआ तब यह भी पता नहीं था की दुसरा युद्ध होगा इसलिए पहले विश्व युद्ध को ऐसे नाम देने का कोई मतलब ही नहीं था इसलिए उसका नाम ‘द ग्रेट वार’ रखा गया , जब दूसरा विश्व युद्ध हुआ तब इसे प्रथम विश्व युद्ध कहा जाने लगा ।

विश्व युद्ध को शुरू करने के लिए एक ओर वजह जिम्मेदार है और वह ये है की राजकुमार को मारने वाला 19 साल का नौजवान गार्विलो प्रांसिप  मूल सर्विया का नागरिक था, और सर्विया ऑस्ट्रिया हंगरी की दुश्मन थी ।

हैरानी की बात यह की यह सब होते हुए भी फ्रेंज जोसेफ काफी दिनों तक शांत रहे और इसको इश्वर द्वारा की गयी अनहोनी कहकर सब सह लिया ,लेकिन उनके सेनापति की सर्विया पर नज़र थी    जो किसी भी तरह सर्विया को ऑस्ट्रिया हंगरी साम्राज्य में मिलाना चाहते थे और उसने ये सब करने के लिए राजा को राजकुमार का बदला लेने ले लिए और सर्विया को अपने साम्राज्य में मिलाने के लिए उकसाया ।

 

23 जुलाई,1914 राजकुमार की हत्या के ठीक 25 दिन बाद ऑस्ट्रिया हंगरी ने सर्विया को 10 प्रस्ताव का मांगपत्र भेजा जिसमें से सर्विया ने 8 बातो को स्वीकार कर  लिया लेकिन 2 बातो के लिए क्षमा मांगी क्योंकि वो बातो से उनका राजधर्म अपंग होता था ऑस्ट्रिया हंगरी को यहीं पर बात ख़त्म कर देनी चाहिए थी लेकिन उल्टा इसके ठीक तीन दिन बाद ऑस्ट्रिया हंगरी ने सर्विया पर युद्ध की घोषणा कर दी ।

28 जुलाई 1914 को ऑस्ट्रिया हंगरी ने सर्विया की उत्तर पश्चिम सीमा पर गोले बरसा दिए और इसने विश्व युद्ध को हवा दे दी ।

विश्वयुद्ध जिसने आधी दुनिया के चिथड़े उड़ाकर रख दिए । Bhaiyaji special

2 अगस्त 1914 को जर्मनी ने फ्रांस को सुचना दे दी कि आप डिक्लेअर करो की आप किसके साथ हो तब फ्रांस ने यह जवाब दिया की अगर युद्ध हो उस परिस्थिति में फ्रांस खुद का निर्णय खुद करेगा, जर्मनी के सम्राट केजर ने सोचा की अगर फ्रांस भी हमारे साथ युद्ध करे तो पूर्व में रूस के साथ और पच्छिम में फ्रांस के साथ दो मोर्चो पर युद्ध करना उसके लिए मुश्किल था इस लिए केजर ने फ्रांस का काम तमाम करना चाहा ।

लेकिन फ्रांस और जर्मन की सीमा पर फ्रांस के फौजी तैनात थे अब जर्मनी के शाशक केजर को यह समझ नहीं आया की सेना को फ्रांस में कैसे प्रवेश दिलाया जाये तो उसने फ्रांस और जर्मनी के बीच बसे एक छोटे से देश बेल्जियम के राजा को सूचित किया की आप अपने देश से हमारे फौजियों को फ्रांस में घुसने की इजाजत दीजिये , लेकिन बेल्जियम के राजा ने इनकार कर दिया जर्मन के ड़र से बेल्जियम के राजा ने ग्रेट ब्रिटेन से सहायता मागी क्योंकि इंन दोनों देशो का पहले करार हो चुका था की अगर बेज्लियम को किसी देश से खतरा हो तो ब्रिटेन उसकी सहायता करेगा और 4 अगस्त 1914 को बेज्लियम सेना के विरोध करने पर भी जर्मन की सेना बेल्जियम में घुस गयी उसी दिन संधि के कारण ब्रिटेन ने भी जर्मन के साथ युद्ध की घोषणा कर दी ।

प्रथम विश्व युद्ध में भारत

 

ब्रिटेन की इस घोषणा के बाद जहां-जहां पर ब्रिटिश राज्य था जैसे की भारत, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, साउथ अफ्रीका, इजिप्ट, कैनेडा, जिनमे सबसे बड़ा सैन्य था भारत देश का, जहाँ से भारत के 850000 हज़ार सैनिको को जहाज में युद्ध लड़ने के लिए ग्रेट ब्रिटेन भेजा गया था ।

 

4 अगस्त के दिन जब यूरोप ने युद्ध की घोषणा की तो एक के बाद एक देश युद्ध में कूद गए और एक ही महीने में 9 देशो ने एक दुसरे के साथ युद्ध का बिगुल बजा लिया और यदि ब्रिटेन राज्य के भारत न्यूजीलैंड ऑस्ट्रेलिया जैसे देश गिने जाये तो कुल 28 देश युद्ध में कूद पड़े जिनमे से गौर करने वाला देश था अमेरिका,जिसको यूरोपियन देशो से कुछ लेना देना नहीं था, लेकिन कुछ विचित्र कारण बने जिससे अमेरिका भी युद्ध में कूद गया, फिर सम्राट केजर ने अपने देश की सबमरीन को अटलांटिक महासागर में काम पर लगा दिया और यह सबमरीन वहाँ आने जाएं वाली सभी जहाजो को टारगेट बनाने लगी , सिर्फ इतना ही नहीं उसने जर्मन पेसेंजेर जहाजों को भी नहीं छोड़ा ।

7 मई 1915 के दिन घटी घटना ने अमेरिका को युद्ध में कूदने के लिए मजबूर कर दिया क्योंकि जर्मन सबमरीन ने ब्रिटेन पेसेंजर जहाज को नस्ट कर दिया जिसमें 1198 लोग मरे गए जिस में 128 अमेरिका के नागरिक थे,और इस तरह धरती के सभी देश आपस में लड़ने लग गए आखिरकार यह युद्ध 11 नवम्बर 1918 को ख़त्म हुआ ।

 

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