कल 14 नवंबर है यानि ”चाचा नेहरु का जन्मदिन” जिसे हम ”बाल दिवस” के रूप में मनाते हैं. तो आज हम वर्तमान परिदृश्य को देखते और समझते हुए आपसे कुछ साझा करते हैं. हाँ, ये खबर थोड़ी अलग जरुर है पर अभी के समय में इसे समझना बहुत अनिवार्य है. आज दुनिया बदल रही है, लोगों की सोच में परिवर्तन आ रहा है. लेकिन फिर भी कुछ चीजों पर लगाम नहीं लग पा रहा है.

हमारे समाज में औरतों को देवियों का दर्ज़ा दिया जाता है पर उसी समाज में औरतों के साथ जो सलूक किया जाता है, वो हमारे समाज के दोगलेपन को दर्शाती है. महिलाओं से छेड़खानी, बदसलूकी, रेप, हत्या, आदि के मामले अब आम हो चले हैं लेकिन यदि कोई 8-10 साल का बच्चा आके कहे कि ये गलत है और मुझे इस समाज में नहीं रहना है तो! बड़ा अजीब हैं ना ये सोच, किन्तु यकीन मानिये एक विडियो में ऐसा ही कुछ देखने को मिल रहा है.

मुझे रेपिस्ट नहीं बनना है, प्लीज बचा लो ! बाल दिवस विशेष - Bhaiyaji

दरअसल फेसबुक पर कुछ समय पहले एक विडियो बहुत वायरल हुआ है. इस विडियो में बच्चे हैं जो अपने माता-पिता से रिक्वेस्ट कर रहे हैं कि उन्हें बड़ा नहीं होना है, उन्हें बचा लो ताकि वो रेपिस्ट ना बने. इस विडियो को ‘फाइनली चेंज बिगिन्स’ ने बनाया है. कीगन पिंटो ने इसे फेसबुक पर शेयर किया है, जो कि ‘फाइनली चेंज बिगिन्स’ के क्रिएटिव हेड हैं. इस वीडियो में छोटे-छोटे बच्चे अपने मम्मी-पापा से खुद को अच्छा इंसान बनाने की गुजारिश कर रहे हैं. बच्चे कह रहे हैं :

     ‘मम्मा-पापा सेव मी, प्लीज मुझे बचा लो. बचा लो मुझे बुरा आदमी बनने से, एक गंदा आदमी बनने से जो औरतों के साथ अश्लील और गिरी हुई हरकतें करता है. सेव मी फ्रॉम ग्रोइंग अप एंड बिकमिंग रेपिस्ट. सेव मी फ्रॉम ग्रोइंग अप एंड बिकमिंग ए मैन, हू ट्राइ टू रेप हर डेट”.

इस विडियो में बच्चों द्वारा बोली गयी बातें बहुत अच्छे से वर्तमान समय और उसकी मांग को दिखाते हैंं. बताया गया है कि स्थिति कैसे दिनोंदिन बद से बदतर होती जा रही है और समय रहते इसे सही करना, इस पर अंकुश लगाना अनिवार्य है अन्यथा परिणाम बहुत बुरे हो सकते हैं.

हममें से अधिकतर लोग न्यूजपेपर या टीवी चैनल देखते हैं. हर दिन कुछ खबरें अलग होती होंगी. लेकिन एक खबर जिससे हम हर रोज, हर घंटे या हर मिनट सुनते हैं, वो लड़कियों से जुड़ी हिंसा की होती है और इसमें कोई बदलाव नहीं आता है. रोजाना कोई-न-कोई लड़की, कहीं-न-कहीं प्रताड़ित होती है. कभी कोई लड़की दहेज के लिए जला दी जाती है तो कहीं प्रेमी ने लड़की पर तेजाब फेंक दिया. तो कभी लड़की के दोस्तों ने ही उसका रेप कर दिया. ये सभी खबर अब आम होती जा रही हैं जिससे हर दिन लोग दो-चार होते रहते हैं.

हाल ही में 31 अक्टूबर को हबीबगंज रेलवे स्टेशन के पास एक 19 वर्षीय छात्रा के साथ गैंगरेप होता है और 2 दिन बाद पुलिस इसकी संज्ञान लेती है. 16 दिसम्बर ,2012 को हुआ ”निर्भया कांड” जिसने बर्बरता की सारी सीमायें पार कर दी, हमसे छुपी नहीं है. और ऐसे ही कई मामले हमारे देश में आये दिन होते हैं, ऐसे में ये एक गुहार आपको सोचने पर मजबूर कर देती है कि हम अपने आनेवाली नस्ल को क्या दिखा और सीखा रहे हैं.

ऐसे सभी घटना के बाद घर से लेकर सोशल साइट्स पर कुछ दिन तक बहस होती है, डिबेट दिखाए जाते हैं फिर सब कुछ नॉर्मल हो जाता है. कुछ नहीं बदलता है, क्योंकि शुरू से ही लड़कों को नहीं समझाया जाता है कि वो लड़कियों को अपने बराबर का इंसान समझें. हमेशा उन्हें लड़कियों से उपर का दर्ज़ा दिया जाता है. इस वीडियो के माध्यम से यही बातें ये बच्चे बता रहे हैं. जिस ओर हमारा समाज़ जा रहा है, उस ओर यह बहुत जरुरी है कि लड़कों की परवरिश में ज्यादा ध्यान दिया जाए बजाय इसके की लड़कियों को उनकी सीमायें हर पल याद दिलाई जायें.

बहुत सीधी सी बात है, यदि नींव मजबूत नहीं होगी तो सब कुछ धाराम से गिर पड़ेगा, एक मजबूत समाज का निर्माण नहीं हो सकेगा. जरुरी है कि बचपन में बच्चों को सही और गलत के बारे में सिखाया जाए. लड़कों की परवरिश में ज्यादा ध्यान देने की जरुरत है ताकि वो बड़े होकर खुदको विकृत मानसिकता से बचा सकें, औरतों की इज्ज़त करें, समाज में उन्हें समान दर्ज़ा दें.

आपमें से कई लोग ये सोचेंगे कि बाल दिवस पर तो सकारात्मक कहानी हमें लिखनी चाहिए पर सोच के देखियेगा कि वर्तमान समय में इससे सकारात्मक और क्या हो सकता है ! खैर, आप सभी को ”बाल दिवस” की हार्दिक शुभकामनाएं !

 

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