Poem by kriti billore on dream क्या कुछ लिखूँ – Bhaiyaji Special

ख्वाब लिखूँ या परवाज़ लिखूँ,
या नई उम्मीदों का आगाज़ लिखूँ,
नई स्याह लिखूं, नई राह लिखूँ | 

कुछ अनकहे अल्फाज़ लिखूँ,
या अंधेरे से राज़ लिखूँ |
सावन की बूंदों का अब्र लिखूँ,
या रेगिस्तान का सब्र लिखूँ ||

कुछ अपने चाहत के पल लिखूँ ,
या कुछ अपनी राहत के ख़त लिखूँ |
खुशहाली के नगमें लिखूँ,
या बदहाली के ख़याल लिखूँ ||

है कलम हाथों से बंधी हुई,
इश्क़ लिखूँ या खौफ लिखूँ,
या छोटी मोटी सी बात लिखूँ |

क्या कुछ लिखूँ अब इस दुनिया का,
तुम ही बताओ आरंभ लिखूँ या अंत लिखूँ।

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