”मेरे  पास  माँ  है……” , दिवार फिल्म का यह फेमस डॉयलोग या यूँ कहे तो ये वन-लाईनर को कहनेवाले बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और कपूर खानदान के बेटे ‘शशि कपूर’ का लंबी बीमारी के बाद सोमवार को निधन हो गया. शशि कपूर की उम्र 79 साल थी. शशि कपूर को तीन बार नेशनल अवॉर्ड मिल चुका है. साथ ही उन्हें फिल्म जगत के सबसे बड़े सम्मान ”दादासाहेब फाल्के” से भी वर्ष 2015 को सम्मानित किया जा चुका है.

मायानगरी मुंबई में बसे फ़िल्मी दुनिया यानि बॉलीवुड की कहानी भी अजीब और नियति से परे होती है. पर्दे पर एक कलाकार इतनी कहानियों को जी चुका होता है कि रियल लाईफ और रील लाईफ में अंतर करना मुश्किल हो जाता है. और जब एक कलाकार अपनी कला के साथ स्वर्ग की और रुख़सत करता है तो पूरी कला जगत उसे सम्मान देती है. सोमवार के दिन भी कुछ ऐसा ही हुआ है. लम्बी बीमारी के बाद सोमवार को बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता ‘शशि कपूर’ का निधन हो गया.

शशि कपूर पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे. मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में शशि कपूर ने अंतिम सांस ली. शशि कपूर ने अपने करियर में 160 फिल्मों (148 हिंदी और 12 अंग्रेजी) में अभिनय किया है. वे 79 वर्ष के थे. 60 और 70 के दशक में उन्होंने जब-जब फूल खिले, कन्यादान, शर्मीली, आ गले लग जा, रोटी कपड़ा और मकान, चोर मचाए शोर, दीवार कभी-कभी और फकीरा जैसी कई हिट फिल्में दी.

शशि कपूर को तीन बार नेशनल अवॉर्ड मिल चुका है. 1979 में शशि द्वारा निर्मित फिल्म जुनून को बेस्ट फीचर फिल्म अवॉर्ड मिला. 1986 में फिल्म न्यू देल्ही टाइम्स के लिए बेस्टर एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला. 1994 में फिल्म ‘मुहाफिज’ के लिए स्पेशल ज्युरी अवॉर्ड भी मिल चुका है.

1984 में पत्नी जेनिफर की कैंसर से मौत के बाद शशि कपूर काफी अकेले रहने लगे थे और उनकी तबीयत भी बिगड़ती गई. बीमारी की वजह से शशि कपूर ने फिल्मों से दूरी बना ली. साल 2011 में शशि कपूर को भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया था. 2015 में उन्हें ‘दादा साहेब फाल्के’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ट्वीट करके शशि कपूर को श्रदांजलि अर्पित की.

भोपाल से था स्पेशल कनेक्शन

भोपाल को ताल-तलैया और नवाबों का शहर तो कहा ही जाता है, लेकिन इस शहर को एक और नाम से भी जाना जाता है. भोपाल को शहर-ए-गजल के नाम से भी पहचान मिली हैं. इसी शहर-ए-गजल में ‘बलबीर राज पृथ्वीराज कपूर’ उर्फ ‘शशि कपूर’ उर्दू शायर बनने आए थे.

हालांकि, वह रियल लाइफ में नहीं बल्कि रील लाइफ में उर्दू शायर बने थे. शशि कपूर ने यहां इन कस्टडी (मुहाफिज) फिल्म की शूटिंग की थी जो उनके कॅरियर की अंतिम हिंदी फिल्म थी. शशि कपूर की मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और इंदौर से कई यादें जुड़ी है. शशि कपूर की 1993 में प्रदर्शित फिल्म इन कस्टडी (मुहाफिज) की शूटिंग भोपाल में हुई थी. शशि कपूर ने इस फिल्म में उर्दू शायर का किरदार निभाया था.

इस फिल्‍म में शशि कपूर के साथ शबाना आजमी, ओम पुरी, परीक्षित साहनी, नीना गुप्ता, सुषमा सेठ जैसे कलाकारों ने भी काम किया. शशि कपूर फिल्म की शूटिंग के दौरान डेढ़ से दो महीने तक भोपाल में रहे. फिल्म की अधिकांश शूटिंग ‘गौहर महल’ में हुई थी. यह वह दौर था जब शशि कपूर का वजन काफी बढ़ चुका था. उन्हें इस लुक में देखकर सभी लोग हैरान थें.

हालांकि, इतने बड़े स्टार होने के बावजूद भी वह हर किसी से बड़े ही आत्मीयता से मिलते थे. शूटिंग के दौरान उनकी कई लोगों से जान-पहचान हुई और वह उनके जेहन में हमेशा के लिए बस गए. भोपाल के अलावा शशि कपूर का इंदौर में भी आना-जाना लगा रहता था. ‘इन कस्टडी (मुहाफिज)’ के लिए शशि कपूर को राष्ट्रीय फिल्म अवार्ड का स्पेशल ज्यूरी अवॉर्ड मिला था.

हांलाकि, इस बीच एक न्यूज़ चैनल ने जल्दबाजी में कांग्रेस संसद ‘शशि थरूर’ के निधन की ख़बर ट्विटर पर डाल दी.

फिर लोगों ने संवेदना प्रकट करने के लिए शशि थरूर के ऑफिस में भी फोन करना शुरू कर दिया. जिसके बाद खुद कांग्रेस सांसद को अपने जिंदा होने की पुष्टि करनी पड़ी. शशि थरूर ने ट्वीट कर लिखा, ‘मेरे ऑफिस में संवेदना भरे कॉल आ रहे हैं. मेरी मौत की खबर अगर अतिशयोक्ति नहीं है लेकिन समय से पहले दी जा रही है.

 

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